नात: ऐ मेरे यार तू क्या मुस्तफ़ा शनास नहीं
📅 04-03-2021 06:44 PM
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कविता
<p>ज़की तारिक़ बाराबंकवीसआदतगंज, बाराबंकी,उत्तर प्रदेशफ़ोन:7007368108</p>
<p>ये तेरे लहजे में क्यूँ उनसुरे-सिपास नहींऐ मेरे यार तू क्या मुस्तफ़ा शनास नहीं</p>
<p>मदीने जाने के असबाब सिर्फ़ बन जाएंनहीं है ग़म कोई दौलत जो अपने पास नहीं</p>
<p>मुझे दिलाएँ गे फ़िरदौसे-नाज़ आक़ा मेरेमेरा यक़ीन है ये दोस्तो क़ियास नहीं</p>
<p>ब फ़ैज़े-आक़ा ऐ महशर मुझे तेरा हाँ तेराकोई भी ख़ौफ़ नहीं है कोई हिरास नहीं</p>
<p>मेरे नबी की अता तुझ को कैसे मिल पाएतेरी तमन्ना में पहलू-ए-इल्तिमास नहीं</p>
<p>दरूद पाक पढ़ो और मोजिज़ा देखोनबी का नाम जहाँ है वहाँ पे यास नहीं</p>
<p>ज़रूर होगा वो दीवान-ए-रसूले-करीममुसीबतों के भँवर में भी जो उदास नहीं</p>
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