सदाए बदर
<p>यौमे बदर (बदर का दिन) 17 रमज़ानुलमुबारक अहले हक़ के लिए उम्मीदों और हौसलों का अज़ीम निशां</p>
<p>सितम हो लाख मगर खौ़फ़ ओ यास थोड़ी हैभरोसा रब पे है दुनिया से आस थोड़ी है</p>
<p>हम अहले हक़ को है "ला तक़नतू" का परवानाकहीं शिकश्ता दिली आस पास थोड़ी है</p>
<p>डरेंगे वो जो फ़क़त नाम के मुसलमा हैंजो सच्चे हैं उन्हें खौफो हिरास थोड़ी है</p>
<p>है मोमिनो के लिए ताजे 'अनतुमुल अअलोन"ये क़ौले रब है, गुमान ओ क़्यास थोड़ी है</p>
<p>सितम में जौहरे मोमिन फरोग़ पाते हैंलिबासे ऐश हमारा लिबास थोड़ी है</p>
<p>नबी के नाम पे मिटने में है बक़ा अपनीहयाते दह्र हमारी असास थोड़ी है</p>
<p>बड़ी तपिश है मगर फिर भी रोज़ा दारों कोये प्यास दिल कि तरावट है प्यास थोड़ी है</p>
<p>फिर आज आया है रमज़ां में बद्र का मंज़रफरीदी हक़ की जमाअत उदास थोड़ी है</p>
<p>कवि: मोहम्मद सलमान रज़ा फरीदी सिद्दीक़ी मिस्बाही, मस्कत ओमान</p>
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