ग़ज़ल
📅 09-02-2022 11:48 PM
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कविता
<p>तेरी नेकी कभी मेरे मोहसिन भूल जाने के काबिल नही हैकाम ऐसा नही कोई जिसमे तेरा एहसान शामिल नही है</p>
<p>भूल बैठा है तू मुझ को लेकिन सच यही है अभी तक मेरा दिलयाद करता है तुझको हमेशा एक लम्हा भी गाफिल नही है</p>
<p>हम न जाने कहां जा रहे है चलते चलते मगर थक गये हैहम मुसाफिर है ऐसे सफर के जिसकी कोई भी मंजिल नही है</p>
<p>तू निकल कर मेरी जिंदगी से रब ही जाने कहां बस गया हैहाल तेरा बताए जो मुझको ऐसा कोई भी आमिल नही है</p>
<p>अपनी नज़रों से उसने ही दिल पर तीर मारा था हमदर्द बन करखुशनुमा सच है उसके अलावा मेरा कोई भी क़ातिल नही है</p>
<p>खुशनुमा हयात (एडवोकेट/ कवियत्री) बुलंदशहर उत्तर प्रदेश भारत</p>
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